पर्यावरण एक ईश्वरीय उपहार ही नही हमारी धरोेहर भी है जिसे सहेजना इसके हर अंग का चाहे मनुष्य हो या पशु दायित्व है। इस संदेश को प्रसारित कर रहा है इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मानव संग्रहालय के वीथि संकुल की विशेष प्रदर्शनी दीर्घा में एकल प्रादर्श के रूप में रखा पोऊबीलाई- एक दैत्याकार अज़गर। 21 फिट लम्बा दैत्याार अज़गर ‘पोऊबीलाई’ अपनी चित्रात्मक कहानियों से स्कूली बच्चों और आम दर्शकों के कौतूहल का केन्द्र तो बना ही है साथ ही कई सार्वभौमिक मुद््दों को सवालिया ढं़ग से लोगों के सामने ला रहा है।
सामाजिक और धार्मिक मान्यताओं से भरे लोक भारत का शिल्प कौशल अद्वितीय है। क्योंकि इसके सृृजन में शिल्पकार की केवल सिद्धहस्तता और उपकरणों का कुशल प्रयोग ही नही भावनात्मक पक्ष, आस्था, विश्वास और दायित्व भी सम्मिलित है। जिसके चलते वह जो गढ़ता है या रचता है वह अद््भुत तो होता है उसके व्यक्तिगत होने के साथ सामुदायिक भी होता है। फिर चाहें वह कोई सुन्दर वस्त्र आभूषण, मुखौटा हो या फिर दैत्याकार अज़गर।
मंगलवार से रविवार प्रतिदिन पूर्व निश्चित तिथि अनुसार 40 विद्यार्थी प्रतिदल की संख्या में भोपाल के स्कूली विद्यार्थी प्रदर्शनी के मार्गदर्शी अवलोकन के पश्चात् अपनी भावनाओं को मिट्टी की आकृृतियों एवं रंगो के माध्यम से व्यक्त कर रहे है।
Date: January 29, 2016