इंदिरा गाँधी राष्ट्रीय मानव संग्रहालय में आयोजित ‘फ्यूजन-2016’ के दूसरा दिन अपेक्षा अनुसार धमाकेदार रहा। गुरु की उपाधि से सम्मानित एवं गुरु रयूबेन के नाम से प्रख्यात नागा फ्यूजन कलाकार, श्री रयूबेन मशांग्वा ने फ्यूजन संगीत की अद्भुत प्रस्तुति दी। राजधानी में अपनी पहली प्रस्तुति देते हुए, श्री रयूबेन ने भोपाल को फ्यूजन संगीत के माध्यम से पारंपरिक लोक संगीत की वृहद् क्षमताओं से परिचित करवाया। बॉब डायलन और बॉब मार्ले के इस नागा प्रशंसक ने अपने गिटार से जातीय लोक ध्वनि को बजाया ऐसा शायद ही कोई कर सके। उनके हाओ संगीत में संगत के लिये प्रयुक्त अन्य वाद्ययन्त्रों में बांस की एक लम्बी बांसुरी ‘यांकाहुई’, आधुनिक सजावटी और पारम्परिक ताल वाद्यों से परे लकड़ी की मोगरी या हथौड़े से बजाया जाने वाले याक के सींग, सम्मिलित है।
फ्यूजन प्रस्तुति में, गुरू रयूबेन ने अपने टेंटिवी (लोक कला एवं सांस्कृतिक गिल्ड-1999) और क्रिएशन(रूट्स रिलीज -2007) एल्बम से गीत प्रस्तुत किये। साथ ही उन्होंने नागालैंड की पहाडियों से कुछ देशज गीत प्रस्तुत किये। गुरु रयूबेन के साथ उनका बेटा, साका भी मंच पर काऊबेल बजाताएवं गीत गाया। बॉब डायलन और बॉब मार्ले के गीतों के बडे प्रशंसक, गुरु रयूबेन कहते है कि बॉब डायलन और बॉब मार्ले गीतों और कविताओं ने दुनिया भर के कलाकारों को प्रभावित किया है। उनके (गुरु रयूबेन) देशज संगीत में भी उन दोनों के विचारों का प्रभाव है। उन्होंने गिटार ध्वनियों के माध्यम से अपनी भावनाओं को व्यक्त किया।
सन 2012 में ओइनाम डोरेन द्वारा ”सोंग्स ऑफ मशंग्वा” नामक 82 मी. की एक वृत्तचित्र फिल्म का निर्माण किया गया था। गुरू रयूबेन पर आधारित वृत्तचित्र में श्री रयूबेन ने अभिनय भी किया। इस फिल्म का चयन लेस्सिनिया फिल्म फेस्टिवल के ’प्रतियोगिता’ श्रेणी में हुआ था तथा इसको बॉस्को चीसनुओव, इटली में प्रदर्शित किया गया था।
गुरू रयूबेन की प्रस्तुति के पश्चात मणिपुर के ”एहूल” बैंड ने भी फ्यूजन की एक प्रस्तुति दी। दिनांक 13 जनवरी को ग्रैमी अवार्ड के लिए नामित हो चुके प्रख्यात बैंड ‘एबायोजेनेसिस’ प्रस्तुति देंगे।
Date: January 13, 2016