एबायोजेनेसिस का फ्यूजन बारहुम और गिटार के साथ

इंदिरा गाँधी राष्ट्रीय मानव संग्रहालय में आयोजित “फ्यूजन-2016“ का तीसरा एवं अंतिम दिन एबायोजेनेसिस के नाम रहा।
नागालैंड के रहने वाले इस बैंड को ख्याति अपने फोक-फ्यूजन संगीत के लिए मिली है। यही करण है कि उनके गीतों में कई संस्कृतियों की महक आती है। इस बैंड ने लोक संगीत को पुनर्जागृत किया है जिसे अब ‘होऊवी’ संगीत के नाम से जाना जाता है। भारतीय, नागा लोक और आधुनिक संगीत के तत्वों के मिश्रण का परिणाम है इनका लीक से हटकर अद्वितीय पुर्णतः अद्भुत संगीत। एबायोजेनेसिस के एलबम “इयोन स्पेल“, “रुस्टिक रेलिश“ और “स्लाइस ऑफ हेवन“ ग्रैमी में नामांकित हो चुकी है।
इस बैंड के सदस्य सुश्री अरेंला सुबोंग (वोकल), लीड गिटारिस्ट श्रो मोया सुबोंग, ड्रमर सोसंग मेरेन एवं बास गिटार पर असो किनावी यिम ने आज प्रस्तुति दी। एबायोजेनेसिस ने अपनी प्रस्तुति की शुरुवात अपने सबसे नए एल्बम के गीत व्हिस्पेरिंग माउंटेन्स से की। इसके पश्चात इन्होने फ्यूजन संगीत के विभिन्न गीत प्रस्तूत किये जो समसामयिक विषय एवं लोक गीतों पर आधारित थे। गीतों के बोल - 2. रिवरसाईड, 3. लव इग्नाइटेड, 4. सरामती टीयर्स, 5. गजिंग ऐट द मून, 6. वाह ताज, 7. टाईम फॉर चेंज, 8. राईट नाओ, 9. वोईस इन किस्मा, रम्बल तुमबले, 11. बाम्हुम शाके, 12. हिच हीकर।
एबायोजेनेसिस के माओ सुबोंग ने बारहुम नामक एक वाद्ययंत्र का आविष्कार किया है। बारहुम के अद्वितीय स्वर बैंड संगीत में एक अलौकिक गुणवत्ता लाने के लिए और एक क्लासिक शैली देने का कार्य करता है। बैंड के एक्शन से भरपूर शो, सकारात्मक, ‘करो या मरो’ रवैया से ही दुनिया भर में इनकी ख्याति बढ रही की है। इन्होने भारत, थाईलैंड, रूस, भूटान और म्यांमाररू आदि देशों में प्रस्तुतियां दी है।

Date: January 14, 2016

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